बिन बोले बिन कहे 09:55 सुजित बालवडकर 2 Comments Category : स्वानंद किरकिरे , हिन्दी कविता स्वानंद किरकिरे बिन बोले, बिन कहे सुने बस हाथों में हाथ धरे चार कदम बस चार कदम इक सांझ चलोगे साथ मेरे?? गीली हथेली थाम के हम नब्जों की लय पर डोलेंगे कदम-कदम की ताल मिले तो