मराठी कविता संग्रह

बिन बोले बिन कहे

09:55 Sujit Balwadkar 2 Comments Category : ,

स्वानंद किरकिरे
स्वानंद किरकिरे
बिन बोले, बिन कहे सुने
बस हाथों में हाथ धरे
चार कदम बस चार कदम
इक सांझ चलोगे साथ मेरे??
गीली हथेली थाम के हम
नब्जों की लय पर डोलेंगे
कदम-कदम की ताल मिले तो

मन ही मन खुश हो लेंगे
हर इक शिकायत गम वम सारे
दो पल को रख परे...
चार कदम बस चार कदम
इक सांझ चलोगे साथ मेरे??
शब्द हरामी
शब्द कमीने
शब्द ने सब नष्ट किया
शब्द खिलाड़ी
शब्द व्यपारी
शब्दों ने सब भ्रष्ट किया
पोंछ कर ये शाब्दों का मरहम
लेकर अपने जख्म चले
चार कदम बस चार कदम
इक सांझ चलोगे साथ मेरे??
मैं हूं स्त्री
तुम मेरे पुरूष
मैं नर हूं
तुम मेरी मादा
जो पूरा है वो सपना है
इक सपना हम आधा-आधा
ये गुत्थी पेचीदा आदिम
इसे सुलझाते हम क्यों मरें?
चार कदम बस चार कदम
इक सांझ चलोगे साथ मेरे??
बिन बोले बिन कहे सुने कुछ
बस हाथों में हाथ धरे....

- स्वानंद किरकिरे





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